Thursday, 1 June 2017

वसंत ऋतु पर कविता

  वसंत ऋतु पर कविता 


बड़ा सुहावन मन भावन
लगे वसंत तेरा आना
थोड़ी सर्दी थोड़ी गर्मी
मौसम बड़ा सुहाना ,

इंद्रधनुष ने खींची रंगोली
सज गई मधुऋतु की डोली
बिखरा दी अम्बर ने रोली
धरती मांग सजा खुश हो ली
छितरी न्यारी सुषमा चहुँदिश
कलियाँ घूँघट के पट खोलीं
आई ठूँठों पे तरुणाई
भर गई उपहारों से झोली,

बड़ा सुहावन मन भावन
लगे वसंत तेरा आना।,

देख हरित धरणी का विजन
हुआ मन मयूर मस्ताना
पीली चूनर सरसों लहराई
उसपे तितली का मंडराना
पी मकरंद मस्त भये मधुकर
मद में मगन दीवाना
गूंजे विहंगों की किलकारी
कुञ्ज-कुटीर मलय भर जाना ,

बड़ा सुहावन मन भावन
लगे वसंत तेरा आना ,

अमराई महके बौराई
मधुकंठी तान सुनाये
देख वासन्ती मादकता नाचे
वन,वीथिक मयूरा बौराये
पछुआ-पुरवा की शीतल सुरभि
नशीला गन्ध जिया भरमाये
पापी पपीहरा पिउ-पिउ बोले
सुध विरहन को पी की सताये ,

बड़ा सुहावन मन भावन
लगे वसंत तेरा आना ,

चित चकोर तिरछी चितवन से
अपने सजन से करे निहोरा
मूक अधर और दृग से चुगली
करे दम-दम सिंगार-पटोरा
प्रकृति नटी भरे उमंग अंग औ
वाचाल कंगना हुआ छिछोरा
बूझे ना अनुभाव बलम अनाड़ी
कंचन देह अंगार दहकावे मोरा ,

बड़ा सुहावन मन भावन
लगे वसंत तेरा आना ,
`
वासन्ती दुपहरिया में गर
संग प्रियतम मेरे होते
प्रीत रंग में नहा सराबोर
हम सारा अंग भिगोते ,
धारे पीत-हरा रंग धरा वसन
चिरयौवन दिखलाये
बहे उन्मादी फागुनी हवाऐं
चाँदनी उर पे बरछी चलाये ,

बड़ा सुहावन मन भावन
लगे वसंत तेरा आना ,

लगे नववधू सी वसुधा
सूरज प्रणय निवेदन करता
इठलाये अवनि हुलास से
होंठों पे शतदल खिलता ,
टेसू,गुलाब,हरसिंगार,पलाश
मौली,कचनार पे पवन है रीझता
मनमोहक बिछा है इन्द्रजाल
दिग-दिगन्त सौन्दर्य दमकता ,

बड़ा सुहावन मन भावन
लगे वसंत तेरा आना ।

                            शैल सिंह

Monday, 29 May 2017

एक छोटी सी गजल

ऐ हवा ला कभी उनके घर की ख़बर
जबसे मिल के गए न मुड़के देखा इधर
जा पता पूछ कर आ बता कुछ इधर
क्यों बदल सी गई हमसफ़र की नजर |

ऐ बहारों कभी मेरे दर से भी गुजर
देख जा आके कैसी खिजां मैं है शज़र
जिसकी हर शाख़ पे वो मचाये ग़दर
हो गए बेखबर क्यूँ आजकल इस कदर ।
                                      शैल सिंह

'' माँ पर कविता ''

'' माँ पर कविता ''


सबसे प्यारी सबसे न्यारी
पूज्यनीया है माँ
माँ से बढ़कर दुनिया में
नहीं कोई बड़ा इन्सान
माँ के आगे सब कुछ बौना
बौना लगे भगवान
माँ दुनिया की पहली अवतरण
जिसे कहते हैं माँ
कि तेरे जैसा कोई नहीं माँ
न तेरे जैसा सुन्दर नाम ,

माँ शब्द शहद से मीठा
आत्मीयता सोम सी माँ की
माँ सृष्टि सृजन की रचईता
सारे अनुष्ठान चरण में माँ की
सबसे बड़ा तीरथ माँ का दर्शन
चारों धाम परिधि में माँ की
माँ त्याग,तपस्या करुणा की देवी
पूजा,मन्त्र है जाप जहाँ की
कि तेरे जैसा कोई नहीं माँ
न तेरे जैसा सुन्दर नाम ,

तेरे गर्भ के गहन प्रेम की
उपलब्धि मैं माँ
तेरे बिना कहाँ सम्भव था
दुनिया में मेरा आना
कितनी पीड़ा दर्द सहा के  
मैं दीदार करूँ दुनिया का 
सारी दुनिया तुझमें समाई
कभी कर्ज़ चुके ना माँ का
कि तेरे जैसा कोई नहीं माँ
न तेरे जैसा सुन्दर नाम ,

तूं ममता की पावन मूरत
तेरा आँचल सुख का सागर
रात-रात भर जाग सुलाई
मुझको लोरी गाकर
तेरे आँचल की छाँव में छलका
निस दिन स्नेह का गागर
भींच सीने में सिर सहलाई
खिली अंक में मुझे लिटाकर
कि तेरे जैसा कोई नहीं माँ
न तेरे जैसा सुन्दर नाम ,

अतुलनीय तेरी ममता,मुझपे
जीवन सहर्ष न्यौछार दिया
कर्तव्य निर्वहन की बेदी पर
वैविध्य प्यार,दुलार किया
तुझ सा नहीं बलिदानी कोई
न तुझ सा माँ कोई उदार,
रक्तकणों से निर्मित कर दी
इतना बड़ा संसार 
कि तेरे जैसा कोई नहीं माँ
न तेरे जैसा सुन्दर नाम ,

सबसे अमूल्य तोहफ़ा ईश्वर की
कैसे शब्दों में बाँधूँ माँ को
सहा ना जाने कितनी मुसीबत
कभी आंच न आने दी मुझको
सबसे सुन्दर​ माँ की रचना 
माँ से सुवासित ये संसार
सर्वस्व लूटाकर बरसाई बस
आशीषों की तरल फुहार
कि तेरे जैसा कोई नहीं माँ
न तेरे जैसा सुन्दर नाम ,

कहाँ मिले तरुवर तले रे माँ
तेरे आँचल सी मीठी छाया
बहुत से रिश्ते दुनिया में पर
निःस्वार्थ न तुझ सी माया
गीली शैय्या सोकर तूने
दिया आँचल का नरम बिछौना
तेरे अंश को नज़र लगे ना
दिया काजल का चाँद ढिठौना
कि तेरे जैसा कोई नहीं माँ
न तेरे जैसा सुन्दर नाम ,

दुनिया में लाई श्रेय तुझे माँ
तेरी उँगली पकड़ सीखा चलना
तूं ही मेरी पहली प्रशिक्षक
तुझी से सीखा बोलना हँसना
हर मुश्किल में तूं संग मेरे
हर जिद पूरी तुझसे
गलत सही का फ़र्क भी जाना
तेरी बतलाई सीख से
कि तेरे जैसा कोई नहीं माँ
न तेरे जैसा सुन्दर नाम ,

भले तूं ओझल दृग से
तेरे एहसास की ख़ुश्बू तन में  
हर पल महसूसती आज भी
तेरी मौजूदगी माँ कण-कण में
तेरे स्पर्श को तरसें बांहें
अँकवार में भरकर रोने को
ढूंढ़ रहे तुझे नैन विक्षिप्त हो
घर के कोने-कोने को
कि तेरे जैसा कोई नहीं माँ
न तेरे जैसा सुन्दर नाम |

ढिठौना --नजर न लगे इसलिए काजल का टीका

                      शैल सिंह