Friday, 14 July 2017

ग़ज़ल '' कोई याद आ रहा है ''

रुमानियत भरा ये मौसम शायरी सुना रहा है
गा रहीं ग़ज़ल फ़िज़ाएं अम्बर गुनगुना रहा है ,

मुँह छिपाये घटा में बादल खिलखिला रहा है
मृदुल आह्लाद भरे इन्द्रधनुष मेघ लुभा रहा है ,

प्रफ़ुल्ल पात-पात लग गले ताली बजा रहा है
महकी हुई दिशाएं वातावरण मुस्कुरा रहा है ,

सावन का सुहाना मन्जर बांसुरी बजा रहा है
अलमस्त अलौकिक छटा माज़ी जगा रहा है ,

बीते मधु पल चपल चित्रित समां करा रहा है
पुरानी स्मृतियों का हसीं जख़ीरा गिरा रहा है ,

चाँद उतर आहिस्ता आँगन उर जला रहा है
इतना ख़ुशगवार लम्हा कोई याद आ रहा है |

                                   शैल सिंह