Wednesday, 25 May 2016

किसने किस्तों में लूटा है देश सबको है पता

           " नमो-नमो को समर्पित "




[ १ ]

ऐसा कोहिनूर हीरा कभी ना मिलेगा
अरे देश वालों क़दर करना जानों
सत्ता की लोलुपता में मसीहा ना नकारो
महान इस विभूति की शिखा तो पहचानो
अंतर्मन के द्वार खोलो और देखो उजाला
क्यों तमस का आँखों पे परदा है डाला
जिसने विश्व की जुबान पे हिंदी हिंदुस्तान का
फूंक दिया है मन्त्र अपने गीता और पुराण का ।

[ २ ]

सियासत के दांव-पेंच से उतर रहा नशा
बदल रहा है देश और सुधर रही दशा
गा रहीं फिजाएं मुस्करा रही दिशा
छंटी मन पे छाई बदरी दीप्त हो रही निशा
बहारों को भी भा गई खिज़ां की हर अदा
नदी,बावड़ी,तालाब हुईं कंवल-कंवल फ़िदा
किसने किस्तों में लूटा है देश सबको है पता
किसके चमके हुनर पे है विश्व दे रहा सदा ।

                                   शैल सिंह


Tuesday, 24 May 2016

नमन तुम्हें नन्हें ज्योतिर्मय दीपक


नमन तुम्हें नन्हें ज्योतिर्मय दीपक



निर्जन रजनी का तूं पथप्रदीप है
अन्तर्मन आलोकित करने वाला
जगमगाता दीप तूं पर्व पुनीत है

चाहे जितने जुगनूँ तारे चमकें
बजता हो आसमां में डंका चाँद का
पर दीपक की परिभाषा अभिन्न
तमकारा चीर सुख देता आनंद का

हरने को तिमिर का तुम्हें पीर हर
जलना दीपक तुम्हें निरन्तर
लिखा बदा में मालिक ने तेरे
नहीं सुस्ताना कभी भी पल भर ,

तुम द्वैत-अद्वैत के मिलन के दीपक
तुम्हीं हो तम् के वाहक दीपक
तुम्हीं हो मन के साधक दीपक
नमन तुम्हें नन्हें ज्योतिर्मय दीपक ,

बिन तेरे हर अनुष्ठान अधूरा
तुम बिन हर विधि-विधान अधूरा
तुम ही धरती के अमरपुत्र हो
हे माटी के राजवंश तुम जीवनसूत्र हो ,

माटी गुण से जीवन परिपूरित तेरा
सारी रात तपा देह नेह आलोक विखेरा
जग का तमस निगल सलोने तूने
दिया सूर्योउदय के हाथ सिन्होरा ।

                           शैल सिंह