Monday, 29 June 2015

ये वादियां,फिजायें दे रहीं आमन्त्रण

ये वादियां,फिजायें दे रहीं आमन्त्रण 

कुर्ग,कोडईकनाल,मुन्नार,लोनावाला
अवकाश का आनंद लेने चलें खंडाला ,

कहीं बीत न जाये गर्मी की छुट्टियां
ऊहापोह में झट खुल ना जाये स्कूल
अनदेखा अनजाना अनुभव होने का
मन कचोटता फिर ना रह जाये शूल ,

वन की विलक्षण वनस्पतियां देखने
अनुपम वाटिका,रंग-विरंगे फूलों का
ये वादियां,फिजायें दे रहीं आमन्त्रण
लुत्फ उठाने को अप्रतिम मौसम का ,

पर्यटन के वैबिध्य रूपों का रोमांचक
एहसास कराने सपनीली दुनिया का
कल-कल बहते झरने पहाड़ी बीच से
साक्षात् देखने नजारा डूबते सूरज का ,

सावन की बरसती रिमझिम फुहारें
उस पर अनुपम सौन्दर्य प्रकृति का
भीनी-भीनी ख़ुश्बू सुहाये वारिश की
ठंडी हवा के झोंके नैसर्गिक सुंदरता ,

हरी-भरी लगतीं खूबसूरत पहाड़ियां
झरनों के इर्द-गिर्द चादर बादल का
कण-कण स्वागत करती मुग्ध धरा
मानसून के जीवन्त सुरभित रंग का ,

प्राकृतिक सुवास से प्राण प्रस्फुटित
पेड़-पत्ते,जीव-जन्तु ,नदी पोखर का
छटा मनोहर भाये मंजुल गोधूलि की
शान्त,एकांत सदाबहार गिरी दल का ,

प्रकृति का अद्भुत उपहार समेटे पहाड़
अलौकिक अनुभूति,मोहक रमणीयता
अनगिनत अनोखी दर्शनीय जगहें यहाँ
बर्फीला रेगिस्तान औ मरुस्थल दिखता ,

अनदेखे कोनों की आओ याद सहेजने
शहरों की हलचल से बिल्कुल अलहदा
जिस सैर से सैलानी मन हो बाग़-बाग़
आओ मस्त चाँद देखो नीले अम्बर का ,

फैला मदहोशी का आलम दूर-दूर तक
कुनकुनाती धुप चहकती आबोहवा का
आह्लादित मखमली,अनछुई वादियां
कौतूहल से कल श्रृंखला नीलगिरि का।

मंजुल--सुन्दर , कल--सुन्दर ,
                                              शैल सिंह